स्तोत्र 64
संगीत निर्देशक के लिये. दावीद का एक स्तोत्र.
परमेश्वर, मेरी प्रार्थना सुनिए, जब आपके सामने मैं अपनी शिकायत प्रस्तुत कर रहा हूं;
शत्रु के आतंक से मेरे जीवन को सुरक्षित रखिए.
 
कुकर्मियों के षड़्‍यंत्र से,
दुष्टों की बुरी युक्ति से सुरक्षा के लिए मुझे अपनी आड़ में ले लीजिए.
उन्होंने तलवार के समान अपनी जीभ तेज कर रखी है
और अपने शब्दों को वे लक्ष्य पर ऐसे छोड़ते हैं, जैसे घातक बाणों को.
वे निर्दोष पुरुष की घात में बैठकर बाण चलाते हैं;
वे निडर होकर अचानक रूप से प्रहार करते हैं.
 
वे एकजुट हो दुष्ट युक्तियों के लिए एक दूसरे को उकसाते हैं,
वे छिपकर जाल बिछाने की योजना बनाते हैं;
वे कहते हैं, “कौन देख सकेगा हमें?”
वे कुटिल योजना बनाकर कहते हैं,
“अब हमने सत्य योजना तैयार कर ली है!”
इसमें कोई संदेह नहीं कि मानव हृदय और अंतःकरण को समझ पाना कठिन कार्य है.
 
परमेश्वर उन पर अपने बाण छोड़ेंगे;
एकाएक वे घायल हो गिर पड़ेंगे.
परमेश्वर उनकी जीभ को उन्हीं के विरुद्ध कर देंगे
और उनका विनाश हो जाएगा;
वे सभी, जो उन्हें देखेंगे, घृणा में अपने सिर हिलाएंगे.
समस्त मनुष्यों पर आतंक छा जाएगा;
वे परमेश्वर के महाकार्य की घोषणा करेंगे,
वे परमेश्वर के महाकार्य पर विचार करते रहेंगे.
 
10 धर्मी याहवेह में हर्षित होकर,
उनका आश्रय लेंगे
और सभी सीधे मनवाले उनका स्तवन करें!