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रब के घर के दरबान
रब के घर के सहन के दरवाज़ों पर पहरादारी करने के गुरोह भी मुक़र्रर किए गए। उनमें ज़ैल के आदमी शामिल थे :
क़ोरह के ख़ानदान का फ़रद मसलमियाह बिन क़ोरे जो आसफ़ की औलाद में से था। मसलमियाह के सात बेटे बड़े से लेकर छोटे तक ज़करियाह, यदियएल, ज़बदियाह, यत्नियेल, ऐलाम, यूहनान और इलीहूऐनी थे।
4-5 ओबेद-अदोम भी दरबान था। अल्लाह ने उसे बरकत देकर आठ बेटे दिए थे। बड़े से लेकर छोटे तक उनके नाम समायाह, यहूज़बद, युआख़, सकार, नतनियेल, अम्मियेल, इशकार और फ़ऊल्लती थे। समायाह बिन ओबेद-अदोम के बेटे ख़ानदानी सरबराह थे, क्योंकि वह काफ़ी असरो-रसूख़ रखते थे। उनके नाम उतनी, रफ़ाएल, ओबेद और इल्ज़बद थे। समायाह के रिश्तेदार इलीहू और समकियाह भी गुरोह में शामिल थे, क्योंकि वह भी ख़ास हैसियत रखते थे। ओबेद-अदोम से निकले यह तमाम आदमी लायक़ थे। वह अपने बेटों और रिश्तेदारों समेत कुल 62 अफ़राद थे और सब महारत से अपनी ख़िदमत सरंजाम देते थे।
मसलमियाह के बेटे और रिश्तेदार कुल 18 आदमी थे। सब लायक़ थे।
10 मिरारी के ख़ानदान का फ़रद हूसा के चार बेटे सिमरी, ख़िलक़ियाह, तबलियाह और ज़करियाह थे। हूसा ने सिमरी को ख़िदमत के गुरोह का सरबराह बना दिया था अगरचे वह पहलौठा नहीं था। 11 दूसरे बेटे बड़े से लेकर छोटे तक ख़िलक़ियाह, तबलियाह और ज़करियाह थे। हूसा के कुल 13 बेटे और रिश्तेदार थे।
12 दरबानों के इन गुरोहों में ख़ानदानी सरपरस्त और तमाम आदमी शामिल थे। बाक़ी लावियों की तरह यह भी रब के घर में अपनी ख़िदमत सरंजाम देते थे। 13 क़ुरा-अंदाज़ी से मुक़र्रर किया गया कि कौन-सा गुरोह सहन के किस दरवाज़े की पहरादारी करे। इस सिलसिले में बड़े और छोटे ख़ानदानों में इम्तियाज़ न किया गया। 14 यों जब क़ुरा डाला गया तो मसलमियाह के ख़ानदान का नाम मशरिक़ी दरवाज़े की पहरादारी करने के लिए निकला। ज़करियाह बिन मसलमियाह के ख़ानदान का नाम शिमाली दरवाज़े की पहरादारी करने के लिए निकला। ज़करियाह अपने दाना मशवरों के लिए मशहूर था। 15 जब क़ुरा जुनूबी दरवाज़े की पहरादारी के लिए डाला गया तो ओबेद-अदोम का नाम निकला। उसके बेटों को गोदाम की पहरादारी करने की ज़िम्मादारी दी गई। 16 जब मग़रिबी दरवाज़े और सल्कत दरवाज़े के लिए क़ुरा डाला गया तो सुफ़्फ़ीम और हूसा के नाम निकले। सल्कत दरवाज़ा चढ़नेवाले रास्ते पर है।
पहरादारी की ख़िदमत यों बाँटी गई :
17 रोज़ाना मशरिक़ी दरवाज़े पर छः लावी पहरा देते थे, शिमाली और जुनूबी दरवाज़ों पर चार चार अफ़राद और गोदाम पर दो। 18 रब के घर के सहन के मग़रिबी दरवाज़े पर छः लावी पहरा देते थे, चार रास्ते पर और दो सहन में।
19 यह सब दरबानों के गुरोह थे। सब क़ोरह और मिरारी के ख़ानदानों की औलाद थे।
ख़िदमत के लिए लावियों के मज़ीद गुरोह
20 दूसरे कुछ लावी अल्लाह के घर के ख़ज़ानों और रब के लिए मख़सूस की गई चीज़ें सँभालते थे।
21-22 दो भाई ज़ैताम और योएल रब के घर के ख़ज़ानों की पहरादारी करते थे। वह यहियेल के ख़ानदान के सरपरस्त थे और यों लादान जैरसोनी की औलाद थे। 23 अमराम, इज़हार, हबरून और उज़्ज़ियेल के ख़ानदानों की यह ज़िम्मादारियाँ थीं :
24 सबुएल बिन जैरसोम बिन मूसा ख़ज़ानों का निगरान था। 25 जैरसोम के भाई इलियज़र का बेटा रहबियाह था। रहबियाह का बेटा यसायाह, यसायाह का बेटा यूराम, यूराम का बेटा ज़िकरी और ज़िकरी का बेटा सलूमीत था। 26 सलूमीत अपने भाइयों के साथ उन मुक़द्दस चीज़ों को सँभालता था जो दाऊद बादशाह, ख़ानदानी सरपरस्तों, हज़ार हज़ार और सौ सौ फ़ौजियों पर मुक़र्रर अफ़सरों और दूसरे आला अफ़सरों ने रब के लिए मख़सूस की थीं। 27 यह चीज़ें जंगों में लूटे हुए माल में से लेकर रब के घर को मज़बूत करने के लिए मख़सूस की गई थीं। 28 इनमें वह सामान भी शामिल था जो समुएल ग़ैबबीन, साऊल बिन क़ीस, अबिनैर बिन नैर और योआब बिन ज़रूयाह ने मक़दिस के लिए मख़सूस किया था। सलूमीत और उसके भाई इन तमाम चीज़ों को सँभालते थे।
29 इज़हार के ख़ानदान के अफ़राद यानी कननियाह और उसके बेटों को रब के घर से बाहर की ज़िम्मादारियाँ दी गईं। उन्हें निगरानों और क़ाज़ियों की हैसियत से इसराईल पर मुक़र्रर किया गया। 30 हबरून के ख़ानदान के अफ़राद यानी हसबियाह और उसके भाइयों को दरियाए-यरदन के मग़रिब के इलाक़े को सँभालने की ज़िम्मादारी दी गई। वहाँ वह रब के घर से मुताल्लिक़ कामों के अलावा बादशाह की ख़िदमत भी सरंजाम देते थे। इन लायक़ आदमियों की कुल तादाद 1,700 थी।
31 दाऊद बादशाह की हुकूमत के 40वें साल में नसबनामे की तहक़ीक़ की गई ताकि हबरून के ख़ानदान के बारे में मालूमात हासिल हो जाएँ। पता चला कि उसके कई लायक़ रुकन जिलियाद के इलाक़े के शहर याज़ेर में आबाद हैं। यरियाह उनका सरपरस्त था। 32 दाऊद बादशाह ने उसे रूबिन, जद और मनस्सी के मशरिक़ी इलाक़े को सँभालने की ज़िम्मादारी दी। यरियाह की इस ख़िदमत में उसके ख़ानदान के मज़ीद 2,700 अफ़राद भी शामिल थे। सब लायक़ और अपने अपने ख़ानदानों के सरपरस्त थे। उस इलाक़े में वह रब के घर से मुताल्लिक़ कामों के अलावा बादशाह की ख़िदमत भी सरंजाम देते थे।